बंगाल की महिलाएं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक अनदेखी किन्तु अत्यंत महत्वपूर्ण शक्ति थीं। उन्होंने सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सीमाओं को पार करते हुए देश की आज़ादी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। उस दौर में महिलाओं की शिक्षा और सार्वजनिक भागीदारी पर प्रतिबंध थे, फिर भी बंगाल की महिलाओं ने सामाजिक रूढ़ियों का विरोध करते हुए शिक्षा के माध्यम से जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे केवल पारंपरिक घरेलू भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि क्रांतिकारी गतिविधियों, असहयोग और खिलाफत आंदोलनों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहीं। इस प्रकार, उन्होंने औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ संघर्ष में अपनी निर्णायक भूमिका निभाई। इस अध्ययन में बंगाल की महिलाओं के साहस, नेतृत्व और बलिदान का विश्लेषण किया गया है, जिनमें बसंती देवी, सरला देवी चौधरानी, बेगम रुकैया जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। इनके प्रयासों ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत किया, बल्कि महिलाओं के सामाजिक अधिकारों और समानता के लिए भी स्थायी मार्ग प्रशस्त किया। साथ ही, यह शोध इस बात पर भी जोर देता है कि स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं के योगदान को अब तक सही स्थान नहीं मिला है। इसलिए, उनके योगदान को इतिहास की मुख्यधारा में शामिल करना और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में स्थान देना आवश्यक है। बंगाल की महिलाओं का संघर्ष न केवल राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह आज के सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों में भी मार्गदर्शक सिद्ध होता है।
Saroj Bala, Jaswant Singh , Amit Chamoli, "भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल की महिलाओं का योगदान: एक क्षेत्रीय अध्ययन", Vol. 3, Issue 1, 18-04-2025, pp. 72-83.