यह अध्ययन ग्रामीण जनसंख्या के नगरीय प्रवास के भौगोलिक और पर्यावरणीय प्रभावों का विश्लेषण करता है। शहरीकरण और औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया में तेजी से वृद्धि ने ग्रामीण जनसंख्या को शहरी क्षेत्रों की ओर आकर्षित किया है, जिसके कारण कई भौगोलिक और पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। शहरी क्षेत्रों में प्रवास करने के बाद, भूमि उपयोग परिवर्तन, शहरी विस्तार, और पर्यावरणीय संकट उत्पन्न होते हैं। ये बदलाव न केवल शहरी संरचनाओं को प्रभावित करते हैं, बल्कि पर्यावरण पर भी गहरा असर डालते हैं।
शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या और बढ़ती मानव गतिविधियों के कारण संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है। जल, बिजली, आवास, और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग में वृद्धि के कारण शहरी क्षेत्रों में इन संसाधनों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप, शहरी क्षेत्रों में जल संकट, वायु प्रदूषण, और अन्य पर्यावरणीय समस्याएं गंभीर रूप से बढ़ रही हैं। जल संकट की समस्या को शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या और पानी की खपत में बढ़ोत्तरी से समझा जा सकता है, जबकि वायु प्रदूषण मुख्य रूप से औद्योगिकीकरण, वाहनों की बढ़ती संख्या, और प्रदूषण फैलाने वाली अन्य गतिविधियों के कारण बढ़ रहा है।
इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि नगरीय प्रवास का पर्यावरण पर गहरा असर पड़ता है। शहरी इलाकों में अधिक आबादी के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की कमी और पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न हो रहा है। शहरी इलाकों में वनों की अंधाधुंध कटाई, प्रदूषण, और अव्यवस्थित शहरी विकास से पर्यावरणीय संकट और भी बढ़ रहे हैं।
Yogesh Tak, Suman, "ग्रामीण जनसंख्या के नगरीय प्रवास के भौगोलिक और पर्यावरणीय प्रभाव", Vol. 4, Issue 1, 26-04-2026, pp. 26-40.