यह शोध कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)-संचालित व्यक्तिगत लर्निंग वातावरणों और पारंपरिक शैक्षिक सेटिंग्स में छात्रों की आलोचनात्मक सोच क्षमताओं के विकास की तुलना करने पर केंद्रित है। वर्तमान शैक्षिक परिवेश में, जहां तकनीकी विकास तेजी से हो रहा है, AI का उपयोग लर्निंग अनुभवों को व्यक्तिगत बनाने, छात्र की क्षमता को बढ़ाने और छात्रों की सोच प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए किया जा रहा है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह मूल्यांकन करना है कि AI-आधारित लर्निंग प्रणालियाँ छात्रों की आलोचनात्मक सोच और विश्लेषणात्मक क्षमताओं को कैसे प्रभावित करती हैं, और क्या पारंपरिक शिक्षा विधियाँ इन क्षमताओं के विकास में समान रूप से प्रभावी हैं। इस तुलनात्मक अध्ययन में दो प्रमुख समूहों का चयन किया गया है: पहला समूह वे छात्र हैं जो AI-आधारित लर्निंग प्रणालियों का उपयोग करते हैं, जैसे कि AI-निर्देशित ट्यूटोरियल, स्मार्ट कक्षाएं, और अन्य AI उपकरण जो छात्रों को उनकी ज़रूरत के अनुसार कस्टमाइज़ करके लर्निंग अनुभव प्रदान करते हैं। दूसरा समूह पारंपरिक कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे छात्रों का है, जहां शिक्षक और पाठ्यक्रम की संरचना द्वारा मार्गदर्शन दिया जाता है। इन दोनों समूहों के बीच आलोचनात्मक सोच और समस्या-समाधान क्षमताओं का मूल्यांकन किया गया। इसके अतिरिक्त, इस अध्ययन में छात्रों के दृष्टिकोण की भी जांच की गई, ताकि यह समझा जा सके कि वे AI को अपनी आलोचनात्मक सोच को बढ़ाने और स्वतंत्र लर्निंग को प्रोत्साहित करने के उपकरण के रूप में कैसे देखते हैं। इसके लिए गुणात्मक डेटा एकत्र किया गया, जिसमें छात्रों से साक्षात्कार, प्रश्नावली और फोकस समूह चर्चाएँ शामिल हैं। इस डेटा से यह जानकारी प्राप्त हुई कि छात्रों ने AI को एक सहायक उपकरण के रूप में माना, जो उन्हें अधिक विश्लेषणात्मक, आलोचनात्मक और स्वतंत्र तरीके से सोचने के लिए प्रेरित करता है।
Vandana Sanadhya, Preeti Sharma, "कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पारंपरिक शिक्षा में आलोचनात्मक सोच का तुलनात्मक विश्लेषण: छात्रों के दृष्टिकोण की जांच", Vol. 3, Issue 1, 22-01-2026, pp. 72-87.