यह शोध पत्र 1942 के भारत छोडो आंदोलन में महहलाओं की सक्रिय भागीदारी और उसके सामाजिक प्रभावों का समग्र ववश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारत छोडो आंदोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक
िन-आंदोलन था, जिसने ब्रिहिश औपननवेशशक शासन के खिलाफ ‘करो या मरो’ के नारे के साथ देशव्यापी
िन-आंदोलन को गनत दी। इस आंदोलन में महहलाओं ने केवल सहायक या पृष्ठभूशम की भूशमका नहीं ननभाई, बजकक वे आंदोलन की अग्रग्रम पंजतत में शाशमल होकर साहस, बशलदान और नेतृत्व का अद्ववतीय उदाहरण प्रस्तुत क्रकया। इस शोध में यह प्रदशशित क्रकया गया है क्रक कैसे महहलाओं ने पारंपररक सामाजिक बंधनों को तोडते हुए सावििननक िीवन में प्रवेश क्रकया और स्वतंत्रता संग्राम के ववशभन्न चरणों में महत्वपूणि योगदान हदया। उनके संघषि ने भारतीय समाि में लैंग्रगक समानता और नारी सशजततकरण की हदशा में एक नई चेतना उत्पन्न की। आंदोलन के दौरान िेल की कठोर पररजस्थनतयों, ब्रिहिश दमन और सामाजिक बाधाओं के बाविूद, महहलाओं ने अपने अग्रधकारों की लडाई िारी रिी और इस प्रकार एक सामाजिक िांनत की शुरुआत की। अध्ययन में यह भी बताया गया है क्रक भारत छोडो आंदोलन के बाद स्वतंत्र भारत के संववधान में महहलाओं को समान अग्रधकार हदए गए और उनकी रािनीनतक, सामाजिक तथा आग्रथिक भागीदारी में वृद्ग्रध हुई। इस आंदोलन ने आधुननक महहला आंदोलनों के शलए एक मिबूत आधारशशला रिी, जिसने महहलाओं को समाि के हर क्षेत्र में सक्रिय भूशमका ननभाने के शलए प्रेररत क्रकया। अतः भारत छोडो आंदोलन न केवल रािनीनतक स्वतंत्रता का प्रतीक था, बजकक यह भारतीय नारी के सामाजिक िागरण और सशजततकरण का महत्वपूणि युग भी था, जिसका प्रभाव आि तक सामाजिक और सांस्कृनतक क्षेत्रों में महसूस क्रकया िाता है।
Saroj Bala, Jaswant Singh , "भारत छोडो आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी और उसका सामाजिक पररणाम", Vol. 3, Issue 1, 19-04-2025, pp. 99-111.