स्वतंत्र भारत के निर्माण के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाई चुनौतियों और युद्धकालीन परिस्थितियों ने भारतीय राज्यों की सैन्य भूमिका को नए रूप में सामने लाया। हरियाणा उन प्रमुख क्षेत्रों में रहा है जहाँ सैनिक सेवा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक परम्परा, ग्राम्य गौरव, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की संस्कृति से जुड़ी हुई रही है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य स्वतंत्र भारत के संदर्भ में हरियाणा की सैन्य परम्परा का सामाजिक-ऐतिहासिक विश्लेषण करना है। इसमें भर्ती-परम्परा, रेजिमेंटीय संबद्धता, वीरता-पुरस्कार, युद्ध-सहभागिता, शहीद-स्मृति तथा राज्य-स्तरीय सार्वजनिक मान्यता जैसे आयामों का अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि हरियाणा की सैन्य परम्परा केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समाज, पारिवारिक संस्कार, युवाओं की आकांक्षाओं, सामुदायिक संगठन और राज्य की स्मृति-राजनीति में भी गहराई से निहित है। स्वतंत्रता के बाद हुए प्रमुख युद्धों और सैन्य अभियानों में हरियाणा के सैनिकों की उपस्थिति ने इस परम्परा को निरंतर जीवित रखा। साथ ही, वीरता-पुरस्कारों और शहीद-सम्मान की संस्थागत व्यवस्था ने इस सैन्य संस्कृति को सामाजिक वैधता प्रदान की। यह शोध-पत्र इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि हरियाणा की सैन्य परम्परा भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे की एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक नींव है।
Sandeep Kumar , Amit Chamoli, "स्वतंत्र भारत में हरियाणा की सैन्य परम्परा का सामाजिक-ऐतिहासिक अध्ययन: भर्ती, वीरता, स्मृति और क्षेत्रीय पहचान", Vol. 3, Issue 7, 24-10-2025, pp. 62-69.