कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मानसिक स्वास्थ्य संवाद-सहायक उपयोगकर्ता को निरंतर, निजी और सहानुभूतिपूर्ण संवाद उपलब्ध कराते हैं। यह सुविधा सहायता तक पहुँच के अवरोध कम कर सकती है, पर कुछ उपयोगकर्ताओं में अनिवार्य पुनःउपयोग, अनुपलब्धता पर व्याकुलता, निर्णय-समर्पण, प्रणाली का मानवीकरण और मानवीय संबंध-विस्थापन भी विकसित हो सकता है। यह शोध-पत्र भावनात्मक निर्भरता और सहायता-प्राप्ति व्यवहार के संबंध को समझने के लिए एक द्विपथ मॉडल प्रस्तुत करता है। लाभकारी पथ में संवाद भावनात्मक स्पष्टता, सामना-कौशल, स्व-प्रभावकारिता और सहायता की तैयारी बढ़ाता है; जोखिमकारी पथ में मानवीकरण और लगातार आश्वासन-खोज निर्भरता बढ़ाते हैं, जो वास्तविक सहायता-संपर्क में विलंब से जुड़ सकती है। प्रस्तावित अध्ययन में 450 विश्वविद्यालयी छात्रों का तीन-समूह अनुदैर्ध्य परीक्षण, दैनिक सूक्ष्म-दैनिकी, न्यूनतम उपयोग-सूचक, भावनात्मक निर्भरता मापनी और गहन साक्षात्कार शामिल होंगे। संरचनात्मक समीकरण, बहुस्तरीय प्रतिगमन और सहायता-संपर्क के समय का जीवन-रक्षा विश्लेषण केंद्रीय विश्लेषण होंगे। लेख का मूल निष्कर्ष यह है कि डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य की सफलता को अधिक उपयोग से नहीं, बल्कि बढ़ती स्वायत्तता, सुरक्षित मानव संबंध और समयोचित सहायता-संपर्क से मापना चाहिए।
सुमन रानी , डॉ. प्रीति, "विश्वविद्यालयी छात्रों के लिए द्विपथ वैचारिक मॉडल और अनुदैर्ध्य शोध-प्रोटोकॉल", Vol. 3, Issue 12, 28-03-2026, pp. 123-131.