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ISSN: 25838512
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ज्वार की कृषि और सतत कृषि: भारत में जलवायु-सहिष्णु उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता

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Abstract

यह शोध-पत्र भारत में ज्वार की कृषि-भूमिका को सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के संयुक्त ढांचे में विश्लेषित करता है। भारत में खाद्य प्रणाली लंबे समय तक चावल और गेहूं पर आधारित रही है, जिसके कारण जल-उपयोग, पोषण-विविधता और वर्षा-आधारित क्षेत्रों की उपेक्षा जैसी समस्याएं सामने आई हैं। ज्वार, एक बहु-उद्देश्यीय और जलवायु-सहिष्णु अनाज, इन चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभरता है। यह अध्ययन एपीडा, प्रेस सूचना ब्यूरो, कृषि मंत्रालय, सीएसीपी, एफएओ, आईसीएआर-आईआईएमआर और संबंधित साहित्य के द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है। परिणामों से स्पष्ट होता है कि भारत में श्री अन्न उत्पादन में सकारात्मक नीति-गति दिखाई देती है; 2024-25 में श्री अन्न उत्पादन 180.15 लाख मीट्रिक टन बताया गया। 2026-27 के लिए ज्वार हाइब्रिड और मालदांडी के एमएसपी में वृद्धि किसान प्रोत्साहन का संकेत देती है। साथ ही, एफएओ के अनुसार ज्वार/मिलेट की जल आवश्यकता तुलनात्मक रूप से कम-मध्यम श्रेणी में है, जो इसे अर्ध-शुष्क और वर्षा-आधारित क्षेत्रों के लिए उपयोगी बनाती है। हालांकि अध्ययन यह भी दिखाता है कि ज्वार की वास्तविक सफलता केवल उत्पादन या एमएसपी घोषणा पर निर्भर नहीं है; इसके लिए खरीद, भंडारण, गुणवत्ता मानक, प्रसंस्करण, स्थानीय भोजन संस्कृति और बाजार मांग आवश्यक हैं। निष्कर्षतः, ज्वार को चावल-गेहूं के पूर्ण प्रतिस्थापन के बजाय विविधीकृत, पोषण-संवेदनशील और जलवायु-अनुकूल खाद्य टोकरी के महत्वपूर्ण घटक के रूप में देखना चाहिए।

How to Cite

विकेश कुमार , सुमन, "ज्वार की कृषि और सतत कृषि: भारत में जलवायु-सहिष्णु उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता", Vol. 3, Issue 4, 25-07-2025, pp. 90-102.